सोमवार, 26 नवंबर 2012

I was away

I hope to restart blogging with some new applications

गुरुवार, 30 जुलाई 2009

स्वास्थ्य पर धीरे मोटापे का असर के अतिरिक्त निवारण के लिए किया जा सकता है: विशेषज्ञ

मधुमेह/डयबेटिस कुछ ऐसी बीमारी है जिसे आप एक साधी ,आराम की जिंदगी गुजर सकते है।

Thursday, July 30, 2009

स्वास्थ्य पर धीरे मोटापे का असर के अतिरिक्त निवारण के लिए किया जा सकता है: विशेषज्ञ
स्वास्थ्य पर धीरे मोटापे का असर के अतिरिक्त निवारण के लिए किया जा सकता है: विशेषज्ञ

वजन शाकर्स स्लाइड शो स्टीवन रिन्बर्ग से <
मंगलवार, 28 जुलाई (HealthDay News) --
मंगलवार वॉशिंगटन डीसी में विशेषज्ञों का एक राष्ट्रीय सम्मेलन में रिपोर्ट. संयुक्त राज्य अमेरिका में अब मोटापा प्रत्यक्ष चिकित्सा की कीमत में प्रति वर्ष $ 147 अरब की भारी कीमत वहन <
सभी चिकित्सा व्यय की बस पर 9%,



"परिप्रेक्ष्य में, यह राशि डाल करने के लिए
अमेरिकन कैंसर सोसायटी
अनुमान है कि
सभी कैंसर
संयुक्त लागत
हमारे स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली
$ 93 बिलियन एक वर्ष.
तो मोटापा समाप्त

हमारे स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली
50% अधिक डॉलर
कैंसर का इलाज, "से अधिक बच होगा

गुरुवार, 23 जुलाई 2009

NDEP का पाम फ्लेट

http://ndep.nih.gov/media/HindiTipsheet.pdf

NDEP का पाम फ्लेट
हेडिंग पर क्लिक करे
मधुमेह/डयबेटिस कुछ ऐसी बीमारी है जिसे आप एक साधी ,आराम की जिंदगी गुजर सकते है.

मधुमेह के उपचार के लिए नयी इंसुलिन

18 July 2009 »


मधुमेह से पीड़ित रोगियों के लिए भारतीय बाजार में एक देशी दवा कंपनी ने ऐसी प्रभावी इंसुलिन ईजाद की है जिसका इस्तेमाल रोगी भोजन से पहले या भोजन के बाद कभी भी कर सकता है।

मधुमेह रोग के विशेषज्ञ डा. कर्नल सुरेंद्र कुमार के अनुसार देश में पहली बार इस तरह की इंसुलिन देशी कंपनी द्वारा तैयार की गयी है जिससे रोगी को बहुत लाभ मिल सकता है और इसका असर 24 घंटे तक रहता है। उन्होंने कहा कि बायोकान फार्मेसी ने इस वर्ष मई में इस इंसुलिन को भारतीय बाजार में उतारा है।
डा. कुमार के अनुसार देश में यह इंसुलिन आयात की जाने वाली इंसुलिन की तुलना में कहीं सस्ती और आसानी से उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी इस दवा का उत्पादन करती थी लेकिन अब भारतीय कंपनी ने देश में ही इसका उत्पादन शुरू कर दिया है।
देश में मधुमेह कमजोर वर्ग को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। एक अनुमान के अनुसार देश में इस समय 10 से 11 प्रतिशत उच्च जीवनशैली के लोग इस बीमारी की चपेट में हैं जबकि निचले स्तर के 33 प्रतिशत लोगों में यह रोग फैल चुका है। एक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 1995 में इस रोग से करीब 1.9 करोड़ लोग पीड़ित थे और वर्ष 2025 तक इसकी चपेट में करीब छह करोड़ लोग आ सकते हैं।
मधुमेह एक खतरनाक रोग है। रोगी जो भोजन खाता है उसके शरीर को उससे पोषण नहीं मिलता है, रोगी जब भोजन करता है तो उसके शरीर की शर्करा (शुगर) बढ़ जाती है लेकिन इंसुलिन इसे संतुलित रखती हैं। जिन लोगों को यह रोग नहीं होता है उनकी इंसुलिन स्वतः बनती रहती है लेकिन इंसुलिन नहीं होने पर शुगर बढ़ जाता है जो व्यक्ति के रक्त संचार, धमनियां, किडनी, जननांग, हृदय तथा आंखों को प्रभावित करता है। मधुमेह के रोगी को जबरदस्त प्यास लगती है और बार-बार पेशाब आता है। रोगी की भूख बढ़ जाती है और अनेक मामलों में उसे धुंधला दिखने लगता है। उसका वजन घटता है अथवा बढ़ता है उसे अक्सर थकान महसूस होती है और नींद आती है। इसके अतिरिक्त रोगी के हाथ या पांव सुन्न हो जाते हैं और महिलाओं के गुप्तांग में खुजली तथा इन्फेक्शन की शिकायत रहती है। इसके अलावा घाव देर से भरता है तथा पसीना ज्यादा आता है।
चिकित्सकों का मानना है कि यह रोग वैसे तो सारी दुनिया के लिये चिंता का कारण बना हुआ है पर भारतीय जीवनशैली में आ रहे बदलाव की वजह से यह रोग भारत में तेजी से फैल रहा है, इसलिए इस रोग से बचाव के तरीकों पर जनजागरण सम्मेलन चलाये जाने चाहिए।


मधुमेह/डयबेटिस कुछ ऐसी बीमारी है जिसे आप एक साधी ,आराम की जिंदगी गुजर सकते है.

जूते की आकार के बारे में एक दिलचस्प टिप्पणि

जूते की आकार के बारे में एक दिलचस्प टिप्पणियों का संमूह निक्सन और सहकर्मियों द्वारा किया गया था
जो लगातार 440 पादचिकित्सा रोगियों के एक अध्ययन में पाया. अधिकांश रोगि पुरुष और सेवानिवृत्त सैनिक थे उनमें से 58% रोगियों को मधुमेह था.
केवल 25% रोगि, उपयुक्त आकारके जूते पहने थे.
लोग जीने मधुमेह सम्बंदिथ पैरों पर अल्सरेशन/ गाव हुवा था, उन लोगो में एक घाव बिना रोगी से ,पांच बार से अधिक खराब फिटिंग जूते पहन ने की संभावना था

सबसे उपयुक्त दृष्टिकोण
टी सुंग और सहयोगियों ने पता लगाया था
एक विशेष जूते के अंदर डालने वाली औजार (जिसे इन्सोल कहते है ) इस्तेमाल किया तो पैर पर गिरने वाला प्रेशर की कंठी हुयी थी . जबकि सिद्दी( फलाट ) इन्सोल ढलवां(मोल्डिंग )कियी गयी इन्सोल सबसे अच्छा है, जब एक इन्सोल की ढलवां(मोल्डिंग )कियी जा राही है (जब गठन करने का कार्य किया)
ताब पैरों पर आंशिक भार डालना ,पैर पर कोई भार नहीं डालने या पूरा भार डालने से बेहतर है
इसीलिए जब उपकरण ढलवां किया जा रहा है आंशिक (आधिसी) वजन डालनी चाहिये

गुरुवार, 16 जुलाई 2009

मधुमेह

please see my other blog
http://diabetiisu.blogspot.com/
i am trying to see when I can have URL in unicode indic letters and trying to reserve the sites for regional languages